TATA cars after GST: कीमतों में बदलाव और ग्राहकों पर असर

TATA cars after GST: भारत में जब से जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू हुआ है, तब से ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कारों की कीमतें पहले की तुलना में एक नए ढांचे में तय होने लगीं। इस बदलाव का असर देश की जानी-मानी कंपनी टाटा मोटर्स पर भी पड़ा है। टाटा मोटर्स न केवल भारतीय बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। आइए जानते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद टाटा कारों की कीमतों, बिक्री और ग्राहकों की जेब पर क्या प्रभाव पड़ा है।

जीएसटी लागू होने से पहले कारों पर कई तरह के टैक्स अलग-अलग स्तर पर वसूले जाते थे। इनमें एक्साइज ड्यूटी, वैट (VAT), रोड टैक्स, सर्विस टैक्स और एंट्री टैक्स शामिल थे। यह टैक्स स्ट्रक्चर न केवल जटिल था, बल्कि राज्यों के हिसाब से भी अलग-अलग था। इसी वजह से ग्राहकों को कार खरीदते समय ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती थी और कंपनियों के लिए भी उत्पादन और बिक्री आसान नहीं थी।

1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद कारों पर टैक्स स्ट्रक्चर आसान हो गया। अब कारों को अलग-अलग स्लैब में रखा गया है।

  • छोटी कारों पर 28% जीएसटी + 1% से 3% सेस
  • मध्यम और बड़ी कारों पर 28% जीएसटी + 15% तक सेस

इससे पहले की तुलना में टैक्स सिस्टम पारदर्शी और सीधा हो गया।

जीएसटी लागू होने के बाद टाटा मोटर्स की कई कारों की कीमतें घटीं, जबकि कुछ गाड़ियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।

  • हैचबैक और छोटी कारें जैसे टाटा टियागो और टिगोर पहले की तुलना में थोड़ी सस्ती हुईं।
  • एसयूवी और बड़ी गाड़ियाँ जैसे टाटा हैरियर और सफारी पर जीएसटी और सेस लागू होने के कारण कीमतें स्थिर रहीं या मामूली बढ़ीं।
  • इलेक्ट्रिक कारों पर सरकार पहले से ही टैक्स रियायतें दे रही है। टाटा की नेक्सॉन EV और टिगोर EV जैसी गाड़ियाँ ग्राहकों के लिए किफायती बनी रहीं।

जीएसटी के बाद टाटा मोटर्स की गाड़ियों की कीमतों में पारदर्शिता आई। अब ग्राहकों को यह समझने में आसानी हुई कि गाड़ी पर कितना टैक्स लग रहा है। साथ ही, कार खरीदते समय ‘ऑन-रोड प्राइस’ का बोझ पहले की तुलना में घट गया। छोटे और मध्यम वर्ग के ग्राहक, जो किफायती गाड़ियाँ खरीदते हैं, उनके लिए टाटा की कारें और आकर्षक विकल्प बन गईं।

जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती महीनों में ऑटोमोबाइल सेक्टर थोड़ी असमंजस की स्थिति में था, लेकिन धीरे-धीरे बाजार स्थिर हुआ। टाटा मोटर्स की टियागो, नेक्सॉन और अल्ट्रोज़ जैसी कारों की बिक्री में तेजी आई। वहीं, एसयूवी सेगमेंट में हैरियर और सफारी ने कंपनी की ब्रांड वैल्यू और मजबूत की।

जीएसटी के बाद सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर सिर्फ 5% GST लगाया है, जबकि पेट्रोल-डीज़ल कारों पर 28% टैक्स लगता है। इस फैसले से टाटा मोटर्स को बहुत फायदा हुआ। टाटा ने EV सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत की और आज नेक्सॉन EV देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार बन चुकी है। जीएसटी लागू होने के बाद टाटा मोटर्स की कारों की कीमतों में पारदर्शिता आई है और ग्राहकों के लिए विकल्प और आसान हुए हैं। छोटी और मिड-रेंज गाड़ियाँ आम लोगों के बजट में आईं, वहीं बड़ी एसयूवी और लग्ज़री कारों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सरकार की इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर दी गई टैक्स रियायतों से टाटा मोटर्स को भविष्य की दिशा में नई ऊर्जा मिली है।

कुल मिलाकर, जीएसटी ने टाटा मोटर्स को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और भी मजबूत बनाने का मौका दिया है और ग्राहकों को किफायती दामों पर बेहतर गाड़ियाँ उपलब्ध करवाई हैं।

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