दहेज के लिए महिला को जिंदा जलाने वाले नोएडा के पति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया | Noida Woman’s Husband, Who Burnt Her Alive Over Dowry, Sent To 14-Day Judicial Custody

दहेज प्रथा एक ऐसी कुप्रथा है, जिसने ना जाने कितनी महिलाओं की ज़िंदगी को निगल लिया है। कानून बनने के बावजूद यह समस्या आज भी समाज में मौजूद है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के नोएडा से एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक घटना सामने आई, जिसने एक बार फिर से पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

एक महिला को उसके ही पति ने दहेज की मांग नहीं पूरी करने पर मार डाला। पुलिस ने आरोपी पति को तुरंत गिरफ्तार कर लिया और उसे अदालत में चौबीस दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला न केवल कानून और समाज के लिए एक चुनौती है, बल्कि हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है कि दहेज जैसी बुराई कब समाप्त होगी?

घटना का पूरा विवरण

यह घटना सेक्टर-49 थाना क्षेत्र में नोएडा में हुई। महिला ने कुछ साल पहले शादी की थी। शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे पति और उसके परिवार ने दहेज की मांग करनी शुरू कर दी।

सूत्रों ने बताया कि पति को मोटरसाइकिल और पैसे की जरूरत थी। जब पत्नी के मायके ने यह मांग पूरी नहीं की, तो घरेलू कलह बढ़ गई। विवाद इतना बढ़ा कि पति ने पहले अपनी पत्नी को पीटा, फिर घर में पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और आग को नियंत्रित किया। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान बचाई नहीं जा सकी।

पीड़िता के परिजनों की शिकायत मिलते ही पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद उसे चौबीस दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

न्यायिक हिरासत का क्या मतलब है?

आम जनता अक्सर “जेल” और “न्यायिक हिरासत” (Judicial Custody) में अंतर नहीं समझती।

  • न्यायिक हिरासत का मतलब है कि आरोपी को अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया जाता है और वह पुलिस की बजाय जेल प्रशासन की निगरानी में रहता है।
  • इस दौरान आरोपी के खिलाफ जांच जारी रहती है और पुलिस अदालत में चार्जशीट पेश करती है।
  • आरोपी को ज़मानत लेने का हक होता है, लेकिन यह अदालत पर निर्भर करता है कि उसे मंजूरी दी जाए या नहीं।

इस केस में आरोपी पति को फिलहाल 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया है। आगे की सुनवाई में इस मामले में सख्त सज़ा की मांग की जा रही है।

दहेज प्रथा: कानून और हकीकत

भारत में दहेज प्रथा को रोकने के लिए कई कड़े कानून बनाए गए हैं, जिनमें से कुछ सबसे महत्वपूर्ण हैं:

दहेज निषेध अधिनियम, 1961— इसमें दहेज देने और लेने दोनों अपराध हैं।

भारतीय दंड संहिता की धारा 304B में दहेज हत्या (Dowry Death) के मामलों में कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

धारा 498A IPC: पति या ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न के मामलों पर सख्त कार्रवाई

कानून तो बने हुए हैं, लेकिन दुख की बात यह है कि ज़मीन पर इनका असर कम ही दिखता है। हर साल हजारों महिलाएं दहेज की भेंट चढ़ जाती हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़े

NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल भारत में 6,000 से अधिक महिलाएं दहेज हत्या का शिकार होती हैं।

दहेज के कारण प्रतिदिन लगभग 20 महिलाएं मर जाती हैं।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में दहेज अपराधों की दर सबसे अधिक है।

नोएडा का यह मामला इन आँकड़ों को और भी गंभीर बनाता है।

नोएडा का यह मामला इन आँकड़ों की गंभीरता को और पुख्ता करता है।

समाज पर इसका प्रभाव

दहेज प्रथा केवल एक महिला की जिंदगी को बर्बाद नहीं करती, बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देती है।

  • महिला का जीवन नष्ट हो जाता है।
  • बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
  • मायके का परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है।
  • समाज की मानवीय संवेदनाएँ धीरे-धीरे खत्म होती जाती हैं।

ऐसे मामलों से देश की छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब होती है।


महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता

आज सबसे बड़ी ज़रूरत है कि महिलाएं अपने अधिकारों को जानें और समय रहते कार्रवाई करें।

  • शादी से पहले और बाद में अगर दहेज की मांग होती है तो तुरंत शिकायत करनी चाहिए।
  • 181 महिला हेल्पलाइन नंबर, 112 आपातकालीन नंबर, और महिला थाने हर राज्य में मौजूद हैं।
  • सोशल मीडिया और एनजीओ के माध्यम से भी ऐसे मामलों में मदद ली जा सकती है।

परिवारों की सोच में बदलाव जरूरी

दहेज प्रथा तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक समाज की मानसिकता नहीं बदलेगी।

  • बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि बराबरी का दर्जा देना होगा।
  • माता-पिता को भी शादी के समय दहेज देने की बजाय अपनी बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की ताकत देनी चाहिए।
  • लड़कों के परिवार को भी इस बात पर गर्व होना चाहिए कि उनकी बहू घर की सदस्य है, कोई “संपत्ति” नहीं।

इस घटना से सबक

नोएडा की यह घटना केवल एक महिला की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है।

  • कानून तभी असरदार होंगे, जब समाज खुद दहेज प्रथा का बहिष्कार करेगा।
  • युवाओं को आगे आकर यह संकल्प लेना होगा कि वे दहेज नहीं लेंगे और न ही देंगे।
  • हर नागरिक को जागरूक होना होगा और ऐसे अपराधों की रिपोर्ट करनी होगी।

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