Arun gawli: 17 साल बाद जेल से बाहर, सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत

Arun gawli दोस्तों! आज हम बात करेंगे मुंबई के कुख्यात गैंगस्टर से राजनेता बने अरुण गवली की, जिन्हें 17 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। 3 सितंबर 2025 को अरुण गवली को नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया, और इस खबर ने पूरे देश में हलचल मचा दी। आखिर कौन हैं अरुण गवली? कैसे एक गैंगस्टर विधायक बना, और 17 साल जेल में बिताने के बाद अब उनकी रिहाई क्यों हुई? चलो, इस 700 शब्दों के ब्लॉग में इस कहानी को समझते हैं।

Arun gawli: गैंगस्टर से ‘डैडी’ तक

Arun gawli, जिन्हें मुंबई में ‘डैडी’ के नाम से जाना जाता है, 80 और 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड का बड़ा नाम था। मुंबई के बायकुला इलाके की दगड़ी चॉल उनका गढ़ था, जहां उनका इतना दबदबा था कि पुलिस भी बिना इजाजत वहां नहीं जाती थी। गवली ने अपने क्राइम करियर की शुरुआत छोटे-मोटे अपराधों से की थी, जैसे टिकटों की कालाबाजारी। बाद में वह फिरौती, तस्करी और हत्या जैसे संगठित अपराधों में शामिल हो गया।एक समय वह दाऊद इब्राहिम का दोस्त था, लेकिन बाद में दोनों के बीच गैंगवार शुरू हो गया।

90 के दशक में जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड का बोलबाला था, गवली ने अपराध की दुनिया को छोड़कर राजनीति में कदम रखा। 2004 में उन्होंने अपनी पार्टी अखिल भारतीय सेना बनाई और मुंबई की चिंचपोकली सीट से विधायक चुने गए।

लेकिन उनकी यह नई पारी लंबी नहीं चली। 2007 में शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के मामले में गवली को दोषी ठहराया गया।

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कमलाकर जामसांडेकर हत्याकांड

2 मार्च 2007 को कमलाकर जामसांडेकर की घाटकोपर में उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जांच में पता चला कि इस हत्या की सुपारी 30 लाख रुपये में दी गई थी, और गवली इसके पीछे थे। मई 2008 में गवली को गिरफ्तार किया गया, और 2012 में मुंबई की सेशन कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत भी केस दर्ज हुआ, और 17 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत

17 साल जेल में बिताने के बाद, गवली ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी दी। 28 अगस्त 2025 को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने उनकी जमानत मंजूर की। कोर्ट ने उनके 17 साल से ज्यादा की कैद और 76 साल की उम्र को ध्यान में रखा। गवली की अपील अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, और अगली सुनवाई फरवरी 2026 में होगी। कोर्ट ने निचली अदालत की शर्तों के तहत जमानत दी, और 3 सितंबर को गवली को नागपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। नागपुर पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में उन्हें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर हवाई अड्डे तक पहुंचाया, जहां से वे मुंबई के लिए रवाना हुए।

गवली का रिहा होना: क्या बदलेगा?

गवली की रिहाई ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या वे अब राजनीति में वापसी करेंगे? खासकर जब मुंबई में बीएमसी चुनाव नजदीक हैं। उनके समर्थकों और परिवार ने जेल के बाहर उनका जोरदार स्वागत किया। गवली के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि उनके मुवक्किल ने परोल या फरलो के दौरान हमेशा नियमों का पालन किया। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने उनकी समयपूर्व रिहाई का विरोध किया था, क्योंकि उनके खिलाफ 46 केस दर्ज हैं, जिनमें 10 हत्या से जुड़े हैं।

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गवली का अतीत और मुंबई का अंडरवर्ल्ड

गवली की कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड की एक झलक दिखाती है। 90 के दशक में दाऊद, छोटा शकील और गवली जैसे नामों ने शहर में दहशत फैलाई थी। गवली ने दगड़ी चॉल को अपने किले की तरह बनाया था। उनकी शादी जुबैदा मुजावर (जो बाद में आशा गवली बनीं) से हुई, जिसके बाद उनका क्राइम करियर और तेज हुआ। उनकी जिंदगी पर ‘डैडी’ नाम से फिल्म भी बनी, जो उनके गैंगस्टर से राजनेता बनने की कहानी दिखाती है।

अरुण गवली की जमानत एक बड़े सवाल को जन्म देती है – क्या वे अब अपराध की दुनिया से पूरी तरह बाहर रहेंगे, या राजनीति में नई पारी खेलेंगे? उनकी रिहाई ने मुंबई में फिर से अंडरवर्ल्ड की चर्चा छेड़ दी है। मेरे हिसाब से, गवली की कहानी हमें सिखाती है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन कानून और समाज से बड़ा कोई नहीं। तुम्हें क्या लगता है? क्या गवली अब शांत जिंदगी जिएंगे, या कुछ और करेंगे? कमेंट में अपनी राय जरूर बताओ। इस ब्लॉग को पढ़ने के लिए धन्यवाद, और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलो!

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