indira ekadashi vrat katha: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। वर्ष भर में 24 एकादशियां आती हैं और प्रत्येक एकादशी का अपना महत्व, व्रत-विधान और फल बताया गया है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किया जाता है। 2025 में भी इंदिरा एकादशी का व्रत विशेष पुण्य प्रदान करने वाला है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।

इंदिरा एकादशी 2025 की तिथि और पारण समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 सितंबर 2025, बुधवार को शाम 05:14 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त : 25 सितंबर 2025, गुरुवार को शाम 06:58 बजे
- पारण (व्रत खोलने का समय) : 26 सितंबर 2025, शुक्रवार को प्रातः 06:10 बजे से 08:40 बजे तक
इंदिरा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में राजा इंद्रसेन के पिता का देहांत हो गया था। मृत्यु के बाद वे यमलोक में चले गए। एक दिन महर्षि नारद राजा इंद्रसेन से मिलने आए और उन्हें बताया कि उनके पिता यमलोक में कष्ट भोग रहे हैं। पितरों की आत्मा की मुक्ति के लिए नारद जी ने राजा को इंदिरा एकादशी का व्रत करने का निर्देश दिया।
इंदिरा एकादशी का महत्व
- पितृ शांति हेतु विशेष – यह एकादशी पितृपक्ष में आती है और माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत पितरों की आत्मा को मोक्ष दिलाता है।
- विष्णु कृपा – जो भी श्रद्धालु इस दिन उपवास कर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
- पाप नाशक – धर्म ग्रंथों में वर्णन है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे शुभ फल मिलता है।
- कुल कल्याण – इस दिन उपवास करने वाले व्यक्ति के साथ-साथ उनके पूरे परिवार को भी सुख-समृद्धि और शांति मिलती है।
व्रत विधि (पूजा पद्धति)
- प्रातःकाल स्नान – ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और संकल्प लें कि आज आप इंदिरा एकादशी का व्रत करेंगे।
- भगवान विष्णु की पूजा – विष्णुजी की मूर्ति अथवा चित्र पर गंगाजल छिड़कें, दीपक जलाएं और तुलसी पत्र अर्पित करें।
- मंत्र जाप – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
- व्रत और उपवास – दिनभर अन्न का त्याग करें। फलाहार या निर्जल उपवास किया जा सकता है।
- पितरों का तर्पण – अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करें और दान दें।
- रात्रि जागरण – रात्रि को भगवान विष्णु का कीर्तन और भजन करें।
- पारण – अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
इंदिरा एकादशी जैसे व्रत केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी हैं।
- उपवास करने से शरीर को डिटॉक्स मिलता है।
- हल्का भोजन और फलाहार पाचन तंत्र को आराम देता है।
- ध्यान और भक्ति से मानसिक शांति मिलती है।
पारण का महत्व
व्रत का फल तभी संपूर्ण माना जाता है जब उसका पारण सही समय पर किया जाए।
- पारण का समय सूर्योदय के बाद ही मान्य होता है।
- यदि पारण समय पर न किया जाए तो व्रत अधूरा रह जाता है और उसका फल भी नहीं मिलता।
- पारण के समय भगवान विष्णु को प्रसाद अर्पित करने के बाद ही फलाहार करना चाहिए।





